मध्यप्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को इलाज, जांच, भर्ती और आईसीयू सहित सभी सेवाओं की रेट लिस्ट सार्वजनिक करना अनिवार्य किया गया। नियम उल्लंघन पर कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण तक की चेतावनी दी गई।
सीधी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे पर शिवसेना नेता ने कालिख पोत दी। स्वास्थ्य अव्यवस्थाओं के विरोध में किए गए इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के बाद नेता ने थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।
सतना और मैहर जिले के आठ निजी नर्सिंग होम और छह पैथोलॉजी सेंटरों पर पंजीयन निरस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। जुलाई माह की संक्रामक बीमारियों की जानकारी आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर अपडेट न करने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तीन दिन में जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
बुधवार को सतना जिले के जिला अस्पताल और एक निजी नर्सिंग होम में दो अलग-अलग घटनाओं में मरीजों से डॉक्टरों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। जिला अस्पताल में एमपीईबी अप्रेंटिस के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे युवक से डॉक्टर ने पैसे की मांग की और मना करने पर धक्का देकर बाहर निकाल दिया। वहीं, भरहुत नगर के निजी नर्सिंग होम में पुराने पर्चे को लेकर विवाद हुआ।
रीवा का संजय गांधी अस्पताल गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार है। मरीजों की चीखें, परिजनों की गुहार और डॉक्टरों की बेरुखी मिलकर बनाते हैं दर्द की दास्तान। रात में इलाज के बजाय डॉक्टर निजी क्लिनिक में व्यस्त, अस्पताल प्रशासन लाचार।

















